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विकास बनाम प्रकृति: कोटद्वार से ऊपर बरसात और भूस्खलन का मेरा अनुभव

Sandeep Singh Negi
May 26, 2026 |

उत्तराखंड में विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन आज एक गंभीर विषय बन चुका है। विशेष कर पहाड़ी क्षेत्रों में सड़क निर्माण और Infrastructure का सीधा प्रभाव प्राकृतिक ढलानों, जल निकासी व्यवस्था और स्थानीय ecosystem पर पड़ता है।

कोटद्वार से ऊपर पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा के दौरान बरसात में बार-बार Road Blocked होने और Landslide की घटनाएँ देखने के बाद यह स्पष्ट हुआ कि यह केवल एक मौसमी समस्या नहीं, बल्कि विकास और पर्यावरणीय योजना के बीच Mismatch का परिणाम है।

इसी कारण यह विषय न केवल पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन की श्रेणी में आता है, बल्कि क्षेत्रीय विकास और आपदा प्रबंधन से भी सीधे जुड़ा हुआ है।

उत्तराखंड में विकास की गति पिछले दशक में अद्भुत रूप से बढ़ी है।

सड़क संपर्क बेहतर हुआ है, पर्यटन का विस्तार हुआ है और नई परियोजनाएँ शुरू हुई हैं। फिर भी, हर वर्ष मानसून के दौरान सड़कों के ध्वस्त होने, पुलों के क्षतिग्रस्त होने और बस्तियों के प्रभावित होने की खबरें सामने आती हैं।

मैं इस विषय पर इसलिए लिख रहा हूँ क्योंकि विकास और प्राकृतिक संतुलन के बीच बढ़ता Mismatch भविष्य के लिए गंभीर संकेत दे रहा है।

हिमालयी क्षेत्र अत्यंत संवेदनशील Ecosystem है। यहाँ की ढलानें प्राकृतिक रूप से नाजुक होती हैं। जब निर्माण कार्य बिना पर्याप्त योजना और वैज्ञानिक अध्ययन के किए जाते हैं, तो प्राकृतिक स्थिरता प्रभावित होती है।

कई बार परियोजनाओं में समय सीमा और लागत को प्राथमिकता दी जाती है, जबकि दीर्घकालिक सुरक्षा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया जाता।

हर साल जब मैं बरसात के मौसम में कोटद्वार से ऊपर पहाड़ी क्षेत्र की ओर यात्रा करता हूँ, तो एक ही दृश्य बार-बार देखने को मिलता है लगातार बारिश, पहाड़ों से गिरता मलबा, और घंटों तक जाम में फंसी हुई गाड़ियाँ।

Photo: Sandeep Singh Negi

कई बार ऐसा हुआ है कि सड़क पूरी तरह से बंद हो जाती है और यात्रियों को कई घंटे इंतजार करना पड़ता है। इस अनुभव ने मुझे यह सोचने पर मजबूर किया कि आखिर हमारी पहाड़ी सड़कें हर साल एक जैसी स्थिति का सामना क्यों करती हैं।

कोटद्वार से ऊपर का क्षेत्र भूगर्भीय रूप से संवेदनशील है। पहाड़ों की मिट्टी और चट्टानें कई जगहों पर ढीली और कमजोर हैं। जब लगातार वर्षा होती है, तो पानी ढलानों के भीतर समा जाता है और मिट्टी का भार बढ़ जाता है। यदि Proper Drainage व्यवस्था न हो तो, यही पानी Landslides का मुख्य कारण बनता है। मैंने खुद देखा है कि कई स्थानों पर पहाड़ काट कर सड़क तो बना दी गई है, लेकिन ढलानों की स्थिरता के लिए पर्याप्त सुरक्षा उपाय नहीं किए गए। बरसात के समय ऊपर से छोटे-छोटे पत्थर गिरना शुरू होते हैं, जो धीरे-धीरे बड़े मलबे का रूप ले लेते हैं।

Photo: Sandeep Singh Negi

कुछ जगहों पर Retaining Walls तो बनाई गई है, लेकिन उनमें पानी निकलने के लिए पर्याप्त Weep holes नहीं हैं। पानी दीवार के पीछे जमा होकर दबाव बढ़ाता है और समय के साथ दीवार कमजोर हो जाती है। परिणामस्वरूप, एक तेज बारिश पूरी सड़क को अवरुद्ध कर देती है।

इस समस्या का दूसरा पहलू यह है कि प्राकृतिक Water evacuation मार्गों को अक्सर अनदेखा कर दिया जाता है। पहाड़ों में पानी का अपना रास्ता होता है। जब निर्माण कार्य के दौरान इन रास्तों को बंद या संकरा कर दिया जाता है, तो बारिश का पानी सड़क पर बहने लगता है और कटाव बढ़ाता है। धीरे-धीरे यह कटाव ढलान को अस्थिर कर देता है।

Photo: Sandeep Singh Negi

जलवायु परिवर्तन ने भी इस समस्या को बढ़ाया है। अब बारिश पहले की तुलना में कम समय में अधिक तीव्रता से होती है। ऐसे में यदि सड़कें और ढलानें Scientific or Engineering तरीके से Design न की जाएँ, तो हर साल वही स्थिति दोहराई जाती रहेगी, Road Blocked, यात्री परेशान, और प्रशासन पर दबाव।

इस समस्या का समाधान केवल अधिक निर्माण करना नहीं, बल्कि बेहतर निर्माण करना है।

परियोजना की प्रारंभिक अवस्था में ही Geotechnical Survey और Risk Assessment अनिवार्य होना चाहिए। पहाड़ी क्षेत्रों में निर्माण के लिए विशेष दिशा निर्देश लागू किए जाने चाहिए।

यदि संवेदनशील स्थानों की पहले से पहचान कर ली जाए, तो बड़े हादसों को रोका जा सकता है। Local Communities और Engineerings के बीच बेहतर Coordination  भी महत्वपूर्ण है।

कोटद्वार से ऊपर की सड़क केवल एक मार्ग नहीं है; यह लोगों की रोज़मर्रा की ज़िंदगी, व्यापार, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की जीवनरेखा है। हर साल बरसात में इसका बंद होना केवल प्राकृतिक आपदा नहीं, बल्कि हमारी योजना और Implementation की कमी का परिणाम भी है।

हिमालय में विकास आवश्यक है, लेकिन विकास का अर्थ केवल सड़क बनाना नहीं, बल्कि ऐसी सड़क बनाना है जो प्रकृति की चुनौतियों का सामना कर सके। यदि हम आज आपदा-रोधी Infrastructure पर गंभीरता से काम नहीं करेंगे, तो आने वाले वर्षों में यह समस्या और भी बढ़ सकती है।

Sandeep Singh Negi is a civil engineering professional with focus on safe and sustainable infrastructure development.

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